विटामिन बी-12 की कमी के कारण क्या है ?

हमने पिछले ब्लॉग में शरीर में विटामिन बी-12 का महत्व और विटामिन बी-12 की कमी के शुरुआती लक्षण क्या होते है ये जाना । अब हम इस ब्लॉग में ये जानेंगे की विटामिन बी-12 की कमी के कारण क्या हो सकते है। इसके बारे में हम विस्तृत में जानते है।

विटामिन बी-12 की कमी के बाह्य कारण।

आज शरीर में विटामिन बी -12 की कमी कारण कई हैं, लेकिन उनमें से एक यह मुख्य कारण है , कि हमारे दैनिक भोजन में ही विटामिन बी-12 की मात्रा कम होना या ना के बराबर होना |

विटामिन बी-12 नई कोशिकाओं के निर्माण या उनकी वृद्धि में हमारे शरीर की विभिन्न चयापचय प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस विटामिन बी-12 की आवश्यकता केवल भोजन से ही शरीर को मिलती है।

हमारे शरीर को विटामिन बी-12 की दैनिक आवश्यकता बच्चों में 0.9 माइक्रोग्राम, वयस्कों में 2.4 माइक्रोग्राम और गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में 5 से 6 माइक्रोग्राम है। यदि भोजन मे ही विटामिन बी -12 की मात्रा कम या न्यूनतम है, तो विटामिन बी-12 की कमी होना स्वाभाविक है।

हम जानते हैं कि विटामिन बी-12 जानवरों या पशु उत्पादों में प्रचुर मात्रा में होता है।

पहला :- मछली, मांस, पशु के गुर्दे या जिगर आदि में उपलब्ध होता है,

दूसरा :- अंडे में होता है, तीसरा पनीर, दूध या दही में और दालों और गरिष्ठ भोजन में बहुत कम मिलता है।

तीसरा :- दुर्लभ समुद्री पौधों में विटामिन बी-12 का स्तर पाया जाता है।

आज के व्यस्त जीवन में सबसे पहले हमारे संतुलित आहार और हमारे भोजन का समय अव्यवस्थित हो गया है. दूसरा, हमें ओरिजनल या प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त न होने के कारण केमिकल वाले या मिलावटी उत्पादों का उपयोग करना पड रहा है ।

जिससे हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है। जो विटामिन बी-12 के शोषण को कम करता है|

कहने का मतलब यह है कि पहले के समय में विटामिन बी-12 भोजन से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता था, जिसके कारण बाहरी सेवन या विटामिन की खुराक बी-12 की आवश्यकता नहीं थी।

विटामिन बी-12 की कमी के आतंरिक कारण।

दैनिक आहार में ही विटामिन बी-12 न होना एक बाहरी कारकों है उसके बारे में चर्चा की, लेकिन आज जिन लोगों के भोजन में विटामिन बीटवेल का स्रोत होता है, फिर भी उनमें विटामिन की कमी होती है। तो आइए विस्तार से चर्चा करते हैं कि आंतरिक कारक क्या हैं।

हम जो भोजन ग्रहण करते हैं वह मुंह से प्रवेश करता है और पाचन तंत्र से गुदा तक विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरता है।

जिसमें हमारा जठर सबसे अहम भूमिका निभाता है। जैसे हमारा जठर भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। उसमे पाचक रसों का स्राव करता है और भोजन को पचाता है।

अब यदि इन तीनों में से कोई भी प्रक्रिया बाधित हो जाती है, तो अपचन , पेट में भारीपन, गैस या अम्लता, कब्ज, शुष्क मल, दस्त, ढीले या पानी वाले मल जैसे विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। पाचन तंत्र के इन सभी रोगों के कारण भोजन से विटामिन बी-12 शरीर को पोषण देने के लिए उपलब्ध नहीं हो पाता है।

तो इसी के संदर्भ में हमारे बी-12 ग्रीन फ़ूड में जो सामग्री हे उसमे से जैसे हल्दी और त्रिफला है जो भोजन को पचाते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं।

एक और समुद्री शैवाल और स्पिरुलिना है, जो विटामिन बीटवेल का एक समृद्ध स्रोत प्रदान करते हैं।

तीसरा है अल्फाल्फा और व्हीट ग्रास, जो विटामिन बी-12 के साथ दूसरी समस्या का समाधान करता है।

यानी हमारे B12GREENFOOD के एक चम्मच चूर्ण से विटामिन बीटवेल तो प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन विटामिन बीटवेल के अवशोषण में बाधा डालने वाली विभिन्न समस्याओं को भी रोका जाता है।

तब तक के लिए …
|| सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे संतू निरामय ||