विटामिन बी 12 के अवशोषण में बाधा डालने वाली बुरी आदते क्या है ?

दोस्तों, विटामिन बीटवेल की इस गहन श्रृंखला में, पिछले ब्लॉग में हमने चर्चा की थी कि भोजन से विटामिन बीटवेल के अवशोषण में भोजन को पहले पचाना कितना महत्वपूर्ण है और उस प्रक्रिया में हमारा जठर कितना महत्वपूर्ण है।

इसके बारे में विस्तार से चर्चा की। लेकिन इस ब्लॉग में हम सबसे दिलचस्प विषय में चर्चा करेंगे यानी ऐसी कौन सी बुरी आदतें हैं जो विटामिन बीटवेल के अवशोषण को कम करती हैं।

विटामिन बीटवेल के अवशोषण को कम करने के कुछ कारण।

पहला : – चाय या कॉफी का अत्यधिक सेवन जिसमें एल्कलॉइड कैफीन होता है। मसालेदार खाना , जंक फूड या प्रोटीन युक्त आहार जो हमारे शरीर में हाइपर एसिडिटी को बढ़ाता है।

दूसरा :- हेवीभोजन, जरूररत से अधिक भोजन करना या फैटी फूड्स  जो हमारे शरीर में अपच को बढ़ाता है।

तीसरा :- तंबाकू, धूम्रपान ,अत्यधिक कोल्ड ड्रिंक्स, शराब का सेवन या ड्रग्स ये सारी चीजे हमारे शरीर में कुअवशोषण करते हैं ।

अब विशेष रूप से समझें  की इसमें हाइपर एसिडिटी मतलब जरूर से अधिक जठर रस या  एसिड का स्राव।   यह अतिरिक्त एसिड, जिसका पीएच 1-3 के बीच होता है, श्लेष्म बाधा को बाधित करता है जो जठर की अंदरूनी परत की रक्षा करता है।

पेट की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। जिसे हम गैस्ट्राइटिस  के नाम से जानते हैं। हम इन नुकसानों को ऊपरी जी आई एंडोस्कोपी में भी देख सकते हैं। इसका मतलब यह है कि इस हाइपर एसिडिटी के कारण पेट अपना काम नहीं कर पाता है जैसे भोजन को छोटे भागों में विभाजित करना, पाचक रसों को स्रावित करना और भोजन को पचाना, जिसके कारण भोजन ठीक से नहीं पचता है और अपच  होता है।

जिससे छोटी आंत का अंतिम भाग इलियम मुख्य रूप से विटामिन बीटवेल को अवशोषित करता है, इस अपचित भोजन से विटामिन बीटवेल का अवशोषण कम हो जाता है। इस पूरी चर्चा का निष्कर्ष यह है कि बुरी आदतों के कारण विटामिन बी 12 के अवशोषण करने वाली कोशिकाएं धीमी गति से नष्ट होती हैं।

स्वाभाविक रूप से, नष्ट होने वाली कोशिकाएं अपना काम पूरी तरह से नहीं कर पाती हैं। इसलिए हमेशा विटामिन बी 12 की कमी होती है। आशा है कि आप बुरी आदतों और विटामिन के बीच संबंध को अच्छी तरह समझ गए होंगे।

हमने विटामिन बीटवेल के अवशोषण में बाधा डालने वाली कुछ बेड हैबिट या बुरी आदतों के बारे में विस्तार से चर्चा की थी।

अपने नियमित जीवन में हम कुछ दवाईया जो डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल करते है ।

अब हम अपने नियमित जीवन की एक ऐसी बुरी आदत यानी ऐसी कुछ दवाईया के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे जो हमारी जरूरत या मजबूरी बन चुकी है।

यह हकीकत है की कुछ दवाईया विटामिन के अवशोषण में बाधा डालती है। तो सबसे पहले हमें अपने पाचन तंत्र की समस्या  जैसे की एसीसीटी, गैस या कब्ज जिसमें हम बिना किसी डॉक्टर की सलाह या प्रिस्क्रिप्शन के अंधाधुंध एंटासिड और पी पी आई का इस्तेमाल करते हैं।

आइए आज इसके बारे में गहराई से चर्चा करते हैं।

पहला :- एंटासिड, दैनिक जीवन में हमें छाती या पेट में जलन हो जाती है। यह जलन  हमारे शरीर में अस्थायी गैस्ट्रिक एसिड में वृद्धि के कारण होती है। इसलिए इस समस्या का इलाज एंटासिड या अनऑर्गनिक सॉल्ट देकर किया जाता है।

आमतौर पर हम इसे गोलि में लेते हैं या पानी में घोल के लेते हैं। इसमें मुख्य रूप से सोडियम बाइकार्बोनेट या एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड जैसे एंटासिड होते हैं। ये एंटासिड या अनऑर्गनिक सॉल्ट  हमारे पेट के एसिड को संतुलित करके एसिडिटी को नियंत्रित करते हैं, लेकिन अत्यधिक उपयोग से हमारे शरीर में Salt Imbalance और कब्ज हो सकता है।

हमने अक्सर कहा है कि पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं विटामिन बीटवेल के अवशोषण में बाधक होती हैं। ऐसे एंटासिड का अत्यधिक उपयोग हमारे शरीर में विटामिन बेटवेल के अवशोषण को कम कर देता है।

दूसरा:-  पीपीआई है, जिन लोगों को पुरानी एसिडिटी और गैस्ट्रिक समस्या है, वे इस पीपीआई को रात के खाने से पहले लेते हैं। ये सभी पीपीआई मुख्य रूप से ओमेप्राज़ोल और रैबेप्राज़ोल हमारे पेट में गैस्ट्रिक एसिड के स्राव को पूरी तरह से रोकने में सक्षम हैं।

यह  रात के समय पाचक रसों के स्त्राव को रोककर एसिडिटी और गैस्ट्रिक रिफ्लक्स की शिकायत को दूर करता है। लेकिन हम जानते हैं कि यह पाचक रसों के स्राव भोजन के पाचन के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

यदि पाचक रसों का स्राव ना हो तो भोजन पचता नहीं है ,यदि भोजन नहीं पचता है तो पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं और हमारे पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं भोजन में विटामिन बेटवेल के अवशोषण को रोकती हैं।

आज हमने जानकी  हैं कि डॉक्टर की सलाह या प्रिस्क्रिप्शन के बिना अंधाधुंध रूप से लिया गया एंटासिड और पीपीआई विटामिन बिटवेल के लिए कितनी बाधा रूप होता  है।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे।